सांख्य दर्शन में विकासवाद
| Vol-2 | Issue-12 | December 2017 | Published Online: 31 December 2017 PDF ( 111 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Dr Seema Sinha 1 | ||
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1Dept. of Philosophy, V.K.S.U., Ara, Bihar |
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| Abstract | ||
इस अनुसंधान से विश्व की उत्पत्ति कैसे हुई, कल भी क्या विश्व का यही स्वरूप था जो आज है या फिर यह मनुष्य के सदियों से चले आ रहे विकास का प्रयत्न का परिणाम है। सांख्य दर्शन का विकासवाद विकासवादी सिद्धांतहै। सांख्य इसे विकास का परिणाम मानता है इनका कहना है कि संसार की उत्पत्ति विकास के द्वारा होती है। इसके विकासवाद की पृष्ठभूमि में इसका सत्कार्यवादा सिद्धांत है, जिसके अनुसार कार्य उत्पत्ति के पूर्व अपने कारण में अव्यक्त रूप में विद्यमान रहता हैद्य यह विकास प्रकृति और पुरुष के संयोग का फल है। |
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| Keywords | ||
| सृष्टि का विकास प्रकृति पुरुष सत्कार्यवाद, पांचतन्मात्राआ, पंचमहाभूत | ||
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