व्यक्तिगत एवं सामूहिक खेलों में भाग लेने वाले छात्रों का तुलनात्मक अध्ययन
| Vol-4 | Issue-5 | May 2019 | Published Online: 25 May 2019 PDF ( 134 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Rajender Parsad 1; Dr. Ramesh Kumar 2 | ||
|
1Research Scholar, Opjs University, Churu, Rajasthan 2Professor,Opjs University, Churu, Rajasthan |
||
| Abstract | ||
खेल एक स्वभाविक, सार्वभौमिक, आत्मप्रेरित और आनन्ददायिनी क्रिया है। दैनिक जीवन में खेलकूद का महत्वपूर्ण स्थान है। खेलकूद से स्वास्थ्य में होने वाली वृद्धि के कारण ही यह कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है। इससे अच्छे बुरे को समझने की शक्ति आती है। महान् दार्शनिक प्लेटो के अनुसार ‘‘बालक को दण्ड की अपेक्षा खेल द्वारा नियंत्रित करना अधिक अच्छा है’’। छात्रों के लिये तो खेलकूद मस्तिष्क को एकाग्र करने का महत्वपूर्ण साधन है। खेलकूद के अभाव से छात्रों का शारीरिक एवं मानसिक विकास पूर्ण रूप से नहीं हो पाता, जिससे उनमें आत्म विश्वास की कमी होजाती है। खेलकूद द्वारा छात्र अपनी अतिरिक्त शक्ति का सदुपयोग कर सकते हैं जिनसे उनका व्यर्थ की बातों की तरफ ध्यान आकर्षित नहीं होता। खेलकूद अनुशासन स्थापित करने का भी एक सशक्त माध्यम है। खेलकूद सामाजिक सहयोग भी उत्पन्न करता है। खेलकूद आपस में प्रेमपूर्वक मिल-जुलकर रहना, आपसी वैर-भाव समाप्त करना तथा विभिन्न जाति व सम्प्रदाय के साथ आपसी तालमेल के द्वारा निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करना भी सिखाता है। |
||
| Keywords | ||
| व्यक्तिगत एवं सामूहिक खेल, छात्र, स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मस्तिष्क | ||
|
Statistics
Article View: 388
|
||

