भारत में महिला मानवाधिकारो का स्वरूप: विश्लेषण
| Vol-5 | Issue-12 | December-2020 | Published Online: 14 December 2020 PDF ( 148 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i12.025 | ||
| Author(s) | ||
| संजय खण्डेलवाल 1 | ||
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1शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर (राज.) |
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| Abstract | ||
संसार में ईश्वर की अनुपम कृति मानव है। मानव की उत्पति का इतिहास अति प्राचीन है। इसका विकास विभिन्न चरणों से हुआ है। मानव के विकास के साथ ही उसे अधिकार की आवश्यकता महसूस हुई। इस आवश्यकता को ही मानवाधिकार कहा जाता है। मानव को अपनी गरिमा बनाये रखने के लिये मानवाधिकरों की आवश्यकता है। मानव के जीवन की कल्पना अधिकारों के बिना नहीं की जा सकती। वस्तुतः किसी व्यक्ति के मानव होने और मानव बने रहने के लिये अधिकार अनिवार्य है। मानवाधिकारों को स्वीकार करने से मानव सभ्यता का विकास संभव हुआ है। |
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| Keywords | ||
| मानवाधिकार, अनुपम, जकड़, जंजीरों, शोषण, इतिहास, असमानता, जनसाधरण। | ||
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