भारतीय ज्योतिष शास्त्र- एक परिचय

Vol-4 | Issue-01 | January 2019 | Published Online: 20 January 2019    PDF ( 121 KB )
Author(s)
डाॅ0 मुकेश शर्मा 1

1प्राध्यापक, संस्कृत विभाग, डी.ए.वी. काॅलेज फाॅर गल्र्ज, यमुनानगर ;हरियाणा

Abstract

द्युति  धतु  से  ज्योतिष  शब्द  निष्पन्न होता  है जिसका अर्थ है प्रकाश  युक्त  पदार्थ।  प्रायः  गगनमण्डल में विद्यमान ग्रह-नक्षत्रादि को ज्योतिष  कहा  जाता है। और इन प्रकाशमय  बिम्बों का  सांगोपांग  वर्णन  जिस शास्त्रा में किया जाता है, उसे ज्योतिष शास्त्रा  कहते हैं। ज्योतिषशास्त्रा के  सर्वसम्मत तीन विभाग है- सि(ान्त, संहिता एवं होरा। सि(ान्त का अपर  नाम गणित है तथा ग्रह सम्बन्ध्ी गणना इसका प्रमुख कार्य है। ग्रह गणना का सम्पूर्ण विश्व पर क्या प्रभाव होगा? ऐसा समष्टिगत विचार संहिता ज्योतिष में किया जाता है। ग्रह की गति-स्थिति का व्यक्ति विशेष अर्थात् व्यक्तिगत पफल होरा स्कन्ध् के अन्तर्गत होता हैै। ज्योतिष शास्त्रा अति प्राचीन काल से प्रचलित है तथा समाज में इसकी अत्यन्त उपयोगिता एवं आवश्यकता है। भारतीय समाज में प्रचलित षोडश-संस्कार ज्योतिष शास्त्रा के बिना सम्पन्न नहीं हो सकते। व्रतेात्सव-पर्वादि का ज्ञान ज्योतिष के माध्यम से ही होता है। यह स्वंय में परिपूर्ण शास्त्रा होकर भी चिकित्सा शास्त्रा, कृषि शास्त्रा, भूगोल विद्या, गणितादि का उपकारक होकर मानव जीवन में परमोपयोगी है।

Keywords
गगनमण्डल सांगोपांग ज्योतिषशास्त्रा
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