प्रशासनिक सुधार के नवीन आयाम
| Vol-2 | Issue-10 | October 2017 | Published Online: 30 October 2017 PDF ( 240 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| डॉ शिव कुमार मीणा 1 | ||
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1व्याख्याता लोक प्रशासन, राजकीय कला महाविद्यालय, सीकर (राज.) |
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केवल एक ही रास्ता है जिससे संगठन पुरानी क्रियाविधियों, अनावश्यक कार्यों तथा बेकार के दोहरे यत्नों से छुटकारा पा सकते हैं, और वह यह है कि प्रत्येक कार्यकलाप को समय-समय पर तीखे पुनरीक्षण के अधीन रखा जाए। प्रशासनिक सुधारों को हमें इस बड़े दायरे में देखना होगा। सतही तौर से देखने पर प्रशासनिक सुधार रोजमर्रा के सरकारी कामकाज से जुड़ी अस्पष्ट-सी धारणा लगती है, लेकिन गहरे अर्थों में यह लोगों के जीवन से जुड़े हैं। सही मायने में तो प्रशासन ही आमजन के लिए सरकार का चेहरा है- चाहे वह गांव का पटवारी हो या भारत सरकार के किसी मंत्रालय का सचिव, चाहे वह ट्रैफिक कांस्टेबल हो या इनकम टैक्स कमिश्नर। प्रशासनिक तंत्र के संस्कार में बदलाव देश में बुनियादी बदलाव की अनिवार्य शर्त है। प्रशासनिक सुधारों का कार्यक्षेत्र संपूर्ण प्रशासन तंत्र तथा उसकी कार्यप्रणाली से संबंधित होता है जो नवीन परिस्थितियों के अनुकूल किया जाता है इसका प्रमुख उद्देश्य किसी भी प्रशासनिक संगठन के कार्य, प्रक्रिया, व्यवहार तथा ढांचे में ऐसे परिवर्तन करने से है जो प्रशासनिक कृत्यों को अधिक कुशल तथा व्यवहारिक बना सकें। लोक प्रशासन का मुख्य उद्देश्य मानव समाज का सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक विकास करना है। अतः वैश्वीकरण और आर्थिक उदारीकरण के इस युग में प्रशासनिक सुधार देश के लिए अति आवश्यक है। वर्तमान में नागरिक अधिकार पत्र, सूचना का अधिकार, शासन में नैतिकता एवं ई-प्रशासन के माध्यम से आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी तकनीकी का उपयोग करके प्रशासनिक सुधार किया जा रहा है। |
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| Keywords | ||
| संरचना, प्रक्रिया, व्यवहार, औपनिवेशिक, वैश्वीकरण, सद्शासन, नैतिकता, जवाबदेही, पारदर्शिता, तटस्थता। | ||
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