पीपली लाइवः कृषक जीवन के त्रासदी को साध्य के बजाय साधन बताती चलचित्र

Vol-3 | Issue-11 | November 2018 | Published Online: 10 November 2018    PDF ( 269 KB )
Author(s)
अमित कुमार झा 1; पूनम लखानी 2

1UGC-Net समाजशास्त्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी

2एम. ए. अंग्रेजी, वसंता कॉलेज फॉर वीमेन (बी.एच.यू.)

Abstract

भारतीय सिनेमा के विकास के इतिहास को देखे तो समय समय पर निर्देशों के अपने फिल्म के माध्यम से किसान के समस्या को दिखाने का प्रयास किया है। इन फिल्मों में एक प्रसिद्ध फिल्म पीपली लाइव आयी थी जिसका निर्देशन अनुषा रिजवी ने किया था। इस फिल्म में किसान जो बैंक के कर्ज में फसाँ जाता है। इस कर्ज से निकलने के लिए और अपनी जमीन बचाने के लिए नत्था द्वारा आत्महत्या का फैसला लिया जाता है। अपने इस फैसले से वह सुर्खियों में आता है। सरकार उसे बचाने का जो भी लेता वो मात्र एक दिखावा रहता है। फिल्म के अंत में सब यह जानते है की नत्था मर गया है फिर भी उसका परिवार सरकार के कागजी करवाई में फस कर रहा जाता है। नत्था इन सभी से दूर शहर में एक मजदूर के रूप में काम करने लगता है।

Keywords
किसान, पीपली लाइव, आत्महत्या, परिवार
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