भारतीय संसद का बदलता स्वरुप: एक आलोचनात्मक अध्ययन

Vol-3 | Issue-08 | August 2018 | Published Online: 07 August 2018    PDF ( 224 KB )
Author(s)
पंकज लखेरा 1

1सहायक प्राध्यापक, राजनीतिक विज्ञान विभाग, स्वामी श्रद्धानंद महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय

Abstract

भारतीय संसद भारत के व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है। संविधान निर्माताओं ने लोगों के प्रतिनिधित्व के तौर पर संसद का निर्माण किया। भारतीय संसद को अन्य संस्थाओं से भी चुनौती मिली है। इन चुनौतियों ने ना सिर्फ संसदीय संस्थाओं को सुदृढ़ बनाया है बल्कि उन्हें प्रभावित भी किया है। आज़ादी के बाद से ही संसद के कार्यकलाप में निरंतरता के साथ ही साथ बदलाव भी हुआ है। यह बदलाव भारतीय राजनीतक प्रक्रिया के कई संदर्भों का नतीजा है।संसदीय संस्थाओं ने अपनी सीमाओं मे रहते हुए भारतीय राजनीति मे दावा पुख्ता किया है।

Keywords
विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, प्राक्कलन समिति, लोक-लेखा समिति, द्विसदन, अप्रत्यक्ष लोकतंत्र
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