नक्सलवाद: आंदोलन से अवसाद तक

Vol-4 | Issue-12 | December 2019 | Published Online: 16 December 2019    PDF ( 120 KB )
Author(s)
दीपा कुमारी 1

1अतिथि व्याख्याता राजनीति विज्ञान विभाग, के. पी. महाविद्यालय, मुरलीगंज, BNMU मधेपुरा

Abstract

देश की आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में श्नक्सलवादश् सर्वाधिक चर्चित मुद्दों में से एक है, जिसकी शुरुआत वर्ग संघर्ष की विचारधारा के रूप में हुई। भारत में नक्सलवाद को वामपंथी उग्रवाद या माओवाद के नाम से भी जाना जाता है। सर्वहारा वर्ग के हितों की रक्षा एवं अधिकारों की मांग को केंद्र में रखकर यह आंदोलन अस्तित्व में आया और इसने अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हिंसात्मक व आक्रामक गतिविधियों को अपना अस्तर्् बना लिया। प्रस्तुत शोध आलेख में नक्सलवाद के प्रादुर्भाव, विकास, स्वरूप में परिवर्तन, प्रभाव, वर्तमान स्थिति तथा इस संदर्भ में सरकार के प्रयास एवं भविष्य की संभावना पर चर्चा की गई है तथा यह समझने का प्रयास किया गया है कि मानव सभ्यता के लिए इस अभिशाप का समाधान क्या हो सकता है?

Keywords
मानवाधिकार, उग्रवाद, हिंसा, समानता, आंदोलन, विचारधारा, जमींदारी प्रथा, जनकल्याण, आदि।
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