धर्म एवं राजधर्म

Vol-4 | Issue-6 | June 2019 | Published Online: 12 June 2019    PDF ( 112 KB )
Author(s)
डा. रेणु सिंह 1

1शिक्षिका (राजनीति विज्ञान) श्री राम लखन सिंह यादव सर्वादय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय, पुनाईचक, पटना-23

Abstract

धर्म की अवधारणा एवं राजधर्म की व्याख्या धर्म के सापेक्ष की गई है। चूँकि धर्म और राजनीति के बीच प्राचीन भारतीय इतिहास एवं साहित्य में बहुतेेरे सामग्री है, जो यह चिन्हित करने में समर्थ है कि धर्म और राजनीति का संबंध काफी निकट का रहा है। ‘‘धर्म’’ शब्द स्वयं में अत्यंत व्यापकता लिए हुए है। इसके उच्चरण से ही संबंधित जाति या समाज का इतिहास और उसके जीवन की भूमिका सामने आ खड़ी होती है। धर्म शब्द में जाति विशेष की सभ्यता, संस्कृति, आचार, विचार, रहन-सहन, रीति-रिवाज तथा जीवन प्रणाली की प्रक्रिया ओर निर्देशन प्रस्तुत होता है। धर्म से अभिप्राय - नैतिकता, दर्शन, कर्मकाण्ड और चमत्कार से है, वहीं राजधर्म राजा की सर्वोच्चता को प्रजाहित में सीमित करने के साथ दण्ड की भी व्यवस्था करता है। वस्तुतः भारत की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं ने धर्म को राजा से अधिक सम्मान प्रदान किया है।

Keywords
धर्म, सहिष्णुता, राजधर्म, उपनिषद्‌, वेद
Statistics
Article View: 731