हिन्दी वाक्य रचनाः एक अघ्ययन
| Vol-4 | Issue-01 | January-2019 | Published Online: 10 January 2019 PDF ( 109 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| खुशबू सिंह 1 | ||
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1सहायक प्रोफ़ेसर, कलिंगा विश्वविद्यालय, नया रायपुर |
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| Abstract | ||
वाक्य ऐसे ध्वनि समूह को कहते हैं जिससे भाव एवं विचार की पूर्णता स्पष्ट होती है। यह एक शब्द से लेकर दस-बीस शब्दों तक का हो सकता है। कभी-कभी एक ही शब्द परिस्थिति विशेष में पूर्ण अर्थ देता है; जैसे-हां, ना आइए, जाइए। इसलिए कुछ विद्वान शब्द को चरम वाक्य कहते हैं। परन्तु इस प्रकार की भाषा से थोड़ा-बहुत ही काम चल सकता है; व्यापक प्रयोग के लिए तो शब्दों को एक विशेष क्रम में संजोना होता है। जब दो या दो से अधिक शब्दों को इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है कि उनसे किसी भाव अथवा विचार की स्पष्ट अभिव्यक्ति होती है तो उसे वाक्य कहते है; जैसे - मैं पढ़ रहा हूं। इस सम्पूर्ण वाक्य के एक ही शब्द में परिवर्तन करने से अर्थ बदल जाता है; जैसे- उपरोक्त वाक्य में ‘पढ़ रहा’ के स्थान पर ‘गा रहा’, ‘सो रहा’, ‘जा रहा’ आदि क्रियाएं लगा देने से वाक्य के भिन्न-भिन्न अर्थ होंगे। इसी प्रकार ‘रहा’ के स्थान पर ‘चुका’ शब्द रखने से वाक्य के अर्थ में परिवर्तन हो जाएगा। अब यदि हम वाक्य को परिभाषित करना चाहें तो इस प्रकार कर सकते हैं- वाक्य दो या दो से अधिक शब्दों का एक ऐसी नियमबद्ध एवं अर्थपूर्ण प्रस्तुति है जिससे किसी भाव अथवा विचार की पूर्णता स्पष्ट होती है।
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| Keywords | ||
| वाक्य, हिन्दी | ||
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