समावेशी शिक्षा के प्रति बी.एड. प्रशिक्षणार्थियों की अभिवृति का अध्ययन

Vol-3 | Issue-09 | September 2018 | Published Online: 07 September 2018    PDF ( 118 KB )
Author(s)
उर्मिला शर्मा 1; विजय सागर शर्मा 2

1शोधार्थी (शिक्षा विभाग) जैन विश्वभारती संस्थान, लाडनूं

2शोधार्थी (शिक्षा विभाग) जैन विश्वभारती संस्थान, लाडनूं

Abstract

एक विद्यार्थी के संदर्भ में शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक क्षेत्र से सम्बंधित बहुत सारी समस्याएं देखी जाती है | इन समस्याओ के कारण विद्यार्थी का विकास अवरुद्ध होता है | सामाजिक, सांस्कृतिक, शारीरिक, मानसिक दृष्टी से अभावग्रस्त बच्चों का स्वाभाविक विकास बाधित होता जाता है | ये अभावग्रस्त बच्चे जो किन्हीं कारणों से सामान्य बच्चों के साथ नहीं रह पाते उनके साथ शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते है | धीरे-धीरे वे बच्चे मानसिक तोर पर पिछड़ जाते है | इसमें मुख्यतः वे दिव्यांग बच्चे आते है जो शारीरिक विकलांग (बहरापन, अन्धापन) मानसिक विकलांग (मंद, सामान्य, तीव्र) व कुसमयोजित होते है | अगर इन्हें सामान्य बच्चों के साथ नहीं रखा जाता तो आगे चल कर इनकी यह नियोग्यता उन्हें अपराध प्रवृति की ओर ले जाती है | समावेशी शिक्षा के द्वारा इन असमर्थ बच्चों को अन्य बच्चों के साथ शामिल किया जाता है | जिससे वे विभिन्न प्रकार के सामाजिक भेदभाव, बहिष्कार, उपेक्षाओ से बचकर अपने स्वाभाविक विकास को प्राप्त करते है | समावेशी शिक्षा के द्वारा उन्हें संविधान की मुख्या धारा से जोड़ा गया है | बी.एड. स्तर पर भी इस विषय को लागू किया है | बी.एड. प्रशिक्षणार्थियों की इस विषय के प्रति अलग-अलग अभिवृति को देखा गया है | इस गंभीर विषय पर बी.एड. प्रशिक्षणार्थियों की अभिवृति का अध्ययन करना ही इस शोध पत्र का मूल उद्देश्य है |

Keywords
शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक
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