धर्मवीर भारती जी की कनुप्रिया का वर्तमान परिदृश्य
| Vol-6 | Issue-03 | March-2021 | Published Online: 15 March 2021 PDF ( 125 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i03.026 | ||
| Author(s) | ||
डाॅं. विद्या शशिशेखर शिंदे
1
|
||
|
1आय.सी.एस. काॅलेज, खेड, खोंडा, भडगांव, ता. खेड, रत्नागिरी, 412709, महाराष्ट्र |
||
| Abstract | ||
कनुप्रिया की सार्थकता उसी में है जहाॅं राधा अपने मन के प्रश्न उपस्थित करके हमें विचार करने के लिए बाध्य करती हैं। युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं हैं। प्रेम ही शाश्वत सत्य हैं। जब कृष्ण जैसा अवतारवादी पुरुष एक ही जीवन में दोहरा आचरण करता है तो प्रश्न उपस्थित होना स्वाभाविक हैं।आधुनिक काल में मानवी जीवन इसी संघर्ष में बीत रहा हैं।आज हर कोई चाहता है कि मूल्य के साथ जिंदगी बिताए मगर अवसरवादी मोह के क्षण जीवन को धोका दे रहे हैं। ऐसे समय पर आत्मा परमात्मा का संघर्ष हर मन की व्यथा हैं। जंगल काटना, पानी को अपवित्र बनाना, युद्ध करना कोई नहीं चाहता मगर अनेक खोखले कारण बताकर उसका महत्व बढाया जा रहा हैं।जैसे की कृष्ण अपने आचरण का कारण कर्म,स्वधर्म,निर्णय, दायित्व जैसे शब्दों के द्वारा प्रकट करता हैं।मगर इन सारे शब्दों का हमें सही अर्थ जानना होगा।माता पिता के प्यार को भूलकर अपने नीजी स्वार्थ हेतु जब बच्चे विदेश में रहते है और अपने कर्तव्य को भूल जाते हैं तब माता पिता के हदय को जो पीडा होती हैं वही दुःख राधा के हर प्रश्न में छिपा हैं।राधा के माध्यम से आज विश्व में शांति लाने के लिए प्रेम ही सर्वश्रेष्ठ मार्ग बताया गया हैं। |
||
| Keywords | ||
| कनुप्रिया के माध्यम से प्रेम का महत्व | ||
|
Statistics
Article View: 517
|
||


