चण्डेश्वर के राज्योद्भव सिद्धान्त का वर्तमान में अनुप्रयोग
| Vol-4 | Issue-01 | January-2019 | Published Online: 10 January 2019 PDF ( 574 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| नीटू दत्त नौटियाल 1 | ||
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1पी.एच.डी. शोधच्छात्र, संस्कृत एवं प्राच्य विद्या अध्ययन संस्थान, जे.एन.यू. दिल्ली |
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| Abstract | ||
आचार्य चण्डेश्वर का मध्यकालीन संस्कृत साहित्यकारों में महत्त्वपूर्ण स्थान है। मध्यकालीन राजनीतिज्ञ में इनका सर्वोपरी स्थान माना गया है। आचार्य ने अपने से पूर्ववर्ती आचार्यों के मतों को उद्धृत किया है। इनके द्वारा लिखित राजनीतिक ग्रन्थ राजनीति-रत्नाकर का अपने आप में बहुत बड़ा महत्त्व है जिसके सिद्धान्तों का आधुनिक राजनीति में प्रयोग किया जा रहा है। आचार्य चण्डेश्वर द्वारा प्रतिपादित राजनैतिक सिद्धान्तों में अन्तर्निहित ‘राजा एवं राज्य’ से सम्बद्ध अवधारणाओं का आधुनिक भारतीय राजनीति में प्रभाव दिखाई पड़ता है। चण्डेश्वर के राजनीतिक विषय-वैविध्य के माध्यम से शक्तिवाद, दैवीय, समाज अनुबन्ध, और सावयव इत्यादि सिद्धान्तों का विकास हुआ है। |
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