ग्रामशी: एक क्रान्तिकारी विचारक
| Vol-4 | Issue-02 | February 2019 | Published Online: 20 February 2019 PDF ( 123 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| डाॅ0 अवधेश कुमार 1 | ||
|
1असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, आर्य कन्या डिग्री कालेज, प्रयागराज, उ0प्र0, भारत। |
||
| Abstract | ||
एन्टोनियों ग्रामशी इटली का एक माक्र्सवादी विचारक था। इन्होंने इटली के संदर्भ में माक्र्सवादी विचार को नयी दिशा दी। ग्रामशी की प्रमुख रचना ‘प्रिजन नोटबुक’ है। जिसकी रचना ग्रामसी ने जेल में रहकर की थी। सम्भव था कि यदि वह जेल से बाहर होता तो ये रचना ही न कर पाता, क्योंकि यह कठिन रचना है। ग्रामशी का महत्व इसमें निहित है कि उसने इसे स्पष्ट करने की कोशिश की कि 40 के दशक में यूरोप के देशों में माक्र्सवादी क्रान्ति क्यों असफल हुई। साथ-ही-साथ उसने उन उपायों पर विचार किया जिनके द्वारा इन देशों में सफलतापूर्वक क्रान्ति की जा सकती है। उसने इस सिद्धान्त की स्थापना की कि जिन देशों में पूँजीवादी व्यवस्था जितनी अधिक विकसित होती है उन देशों में उसकी जड़े उतनी ही गहरी होती है। अतः उन देशों में क्रान्ति उतनी ही कड़ी होती है। किन्तु जिन देशों में पूँजीवादी व्यवस्था अधिक विकसित नहीं हो पायी है। उन देशों में (पूँजीवाद) सरलतापूर्वक क्रान्ति की जा सकती है क्योंकि सोवियत संघ में पूँजीवादी व्यवस्था अधिक विकसित नहीं हो पायी थी इसलिए वहाँ माक्र्सवादी क्रान्ति सफल हुई। पश्चिमी यूरोप के देशों में पूँजीवादी व्यवस्था अधिक विकसित थी इसलिए इन देशों में माक्र्सवादी क्रान्ति को सफलता नहीं मिल सकी। |
||
| Keywords | ||
| एन्टोनियों ग्रामशी, माक्र्सवादी, पूँजीवादी, सोवियत संघ एवं लोकतंत्र। | ||
|
Statistics
Article View: 278
|
||

