अरुणाचल प्रदेश की आदी जनजाति के लोकगीत पर एक विमर्श
| Vol-4 | Issue-01 | January-2019 | Published Online: 10 January 2019 PDF ( 176 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.2544769 | ||
| Author(s) | ||
विजय कुमार यादव
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1पी.एच.डी. शोध छात्र, हिन्दी विभाग, राजीव गाँधी विश्वविद्यालय, ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश (भारत) |
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| Abstract | ||
इस शोध पत्र में अरुणाचल प्रदेश के आदी जनजाति के लोकगीत के बारे में बताने का प्रयास किया गया है । अरुणाचल प्रदेश की एक प्रमुख जनजाति है यह आदी जनजाति । किसी भी समाज में लोकगीतों एवं लोककथाओं का महत्वपूर्ण स्थान होता है । लोकगीत, लोक- कण्ठ से उपजा लोक- मानस की मधुर अभिव्यक्ति है । लोकगीत का विस्तार अत्यन्त व्यापक होता है । साधारण जनता जिन शब्दों में गाती है, रोती है, खेलती है, हँसती है, खुशीयाँ मनाती है उन सभी को लोक साहित्य के अन्तर्गत माना जा सकता है । |
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| Keywords | ||
| आदी जनजाति, लिपि, लोकगीत, सामाजिक संरचना, संचालन, प्रयोजन, सेहरा, शगुन, लीपो, लोरी,मिरी, अनुष्ठान, उपासना, दिनी- पोलो । | ||
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