भारत के सार्वजनिक क्षेत्रों में जारी विनिवेश नीति: एक अध्ययन
| Vol-5 | Issue-9 | September-2020 | Published Online: 15 September 2020 PDF ( 294 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i09.060 | ||
| Author(s) | ||
| दीपक कुमार 1 | ||
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1एम॰ कॉम (वाणिज्य) नेट, यू॰ जी॰ सी॰, इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय |
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| Abstract | ||
भारतीय अर्थव्यवस्था मूलतः एक अल्प विकसित अर्थव्यवस्था है। वर्तमान समय में भारतीय अर्थव्यवस्था प्रगति की ओर बढ़ रही है। 21 वीं शताब्दी मेंदेश की अर्थव्यवस्था अन्य सेबेहतर स्थिति को प्रदर्शित करने हेतु प्रयत्नशील है। अर्थव्यवस्था में राष्ट्र के विकास का स्तर देखने के लिए बहुत से कारण एवं परिणाम है यथा- राष्ट्रीय आय, कार्यशील जनशक्ति, पूँजी निर्माण, बेरोजगारी, प्रति व्यक्ति आय, खाद्यान्न आदि। भारत सार्वजनिक क्षेत्र का विकास करके सरकार अर्थव्यवस्था में आधारभूत सेवाओं जैसे परिवहन, यातायात, बैकिंग, विद्युत, संचार आदि सेवाएं उपलब्ध कराती है साथ ही उद्योग हेतु आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय स्त्रोत प्रदान करते हैं। औद्योगिकरण से उद्योगों की स्थापना की गयी तथापि कुछ क्षेत्रों में उद्योग विहिन होने के कारण क्षेत्रीय असंतुलन की स्थिति देखने को मिलती है। जैसे-जैसे देश में औद्योगिक क्रांति आती गयी, उसमें जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती गयी। यही कारण है कि तीव्र विकास के बावजूद जनसाधारण की गरीबी और बेरोजगारी पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ सका। अतः आज भी उनका जीवन स्तर असन्तोषजनक है। |
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| Keywords | ||
| अर्थव्यवस्था, कार्यशील जनशक्ति, खाद्यान्न, परिवहन, संचार। | ||
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