सद्विचार और सद्व्यवहार का आधार-संस्कार
| Vol-5 | Issue-9 | September-2020 | Published Online: 15 September 2020 PDF ( 103 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i09.034 | ||
| Author(s) | ||
| डाॅ॰ रामानन्द कुमार रमण 1 | ||
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1M.A., Ph.D, संस्कृत, बी.एन.एम.यू. मधेपुरा, बिहार |
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| Abstract | ||
भारत के ऋषियों-मनीषियों ने अपनी तप साधना के महासागर से शोधकर संसार के अभ्युदय हेतु ज्ञान राशि परिकलित किया। संसार का कल्याण ही जिनका अपना कल्याण था, संसार का सुख ही उनका अपना सुख था, संसार का आनन्द ही उनका अपना आनन्द था। उनके हर साँस से केवल एक ही ध्वनि निकलती थी- |
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| Keywords | ||
| आप्तकाम, पूर्णकाम, परम निष्काम, अमलात्मा, शुद्धात्मा, योगीन्द्र | ||
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