भारत में महिला श्रमिकों पर गर्भावस्था का प्रभाव
| Vol-5 | Issue-9 | September-2020 | Published Online: 15 September 2020 PDF ( 363 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i09.027 | ||
| Author(s) | ||
डाॅ॰ डेजी कुमारी
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1M.A, Ph.D. गृह विज्ञान बी.एन.एम.यू. मधेपुरा बिहार |
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| Abstract | ||
भारत की अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों का बहुत महत्पूर्ण योगदान है, लेकिन यही महिला श्रमिक जब गर्भ धारण करती है तो इन्हें बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जैसे- कार्य सम्बन्धी समस्याएँ, रसायनिक जैविक हानि कारक विकिरणों के संसर्ग से गर्भस्थ शिशु में समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। अत्यधिक शारीरिक श्रम और तनाव से कई बार गर्भपात का भी खतरा बना रहता है। सहकर्मियों की सहभागिता, सरकार की कुछ योजनाएँ जैसे डंजमतदपजल ंबज 2017 से कुछ हद तक लाभ मिला है। फिर भी आधी से ज्यादा गर्भवतियों में उच्च रक्तचाप, पीठ दर्द, कमर दर्द, रक्ताल्पता की समस्याएँ बनी रहती हैं। इन सबसे बचने के लिए शहरी क्षेत्र की महिलाएँ पूर्व नियोजित गर्भधारण करती है। जिससे उनकी समस्याएँ थोड़ी कम हो जाती है। दुर्भाग्यवश ये चीजें ग्रामीण महिलाओं के बीच कम देखा जाता है। |
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| Keywords | ||
| गर्भधारण, गर्भवती महिला, गर्भस्थ शिशु | ||
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