हैदर अली की कूटनीति का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Vol-2 | Issue-9 | September 2017 | Published Online: 15 September 2017    PDF ( 119 KB )
Author(s)
DR MANJAY PD. KASHYAP 1

1Assistant Teacher, Lakhisarai ( Government of Bihar)

Abstract

हैदर 1721 ई0 में पैदा हुआ था। एक सैनिक होने के नाते न तो वह वंश और न वैभव का ही दावा कर सकता था। बड़ी कठिनाई से वह मैसूर के मंत्री नंदराज की सेवा में भर्ती हुआ। उसने पहली बार यूरोपीय संग्राम को कर्नाटक युद्ध के त्रिचनापल्ली में देखा जिसमें पहले तो नंदराज ने अंग्रेजों के पक्ष में और बाद में फ्रांसीसियों के पक्ष में भाग लिया। फलतः कम समय में ही उसके संसाधन समाप्त हो गए। हैदर नंदराज को पराजित कर अपना प्रभुतव स्थापित करने योग्य हो गया। कुछ और विशेष कठिनाईयां, विशेषकर उसके अपने मंत्री खांडे राव का विरोध उसे 1761 ई0 तक सत्ता हथियाने से रोके रहा। बाद में उसने अपनी सैनिक और राजनीतिक योग्यता से अपने सारे प्रतिद्वन्द्वियों का सामना किया। प्रस्तुत अध्ययन में ब्रिटिश प्रतिरोध और अन्य चुनौतियों के बावजूद प्रथम मैसूर युद्ध तक हैदर अली की योग्यता और कूटनीति को विश्लेषित किया गया है।

Keywords
वैभव, राजनीतिक योग्यता, प्रतिद्वन्दी, संग्राम
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