हिन्दी कविता और दलित विमर्श
| Vol-4 | Issue-04 | April 2019 | Published Online: 15 April 2019 PDF ( 113 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Ramita Devi 1 | ||
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1MA in Hindi (UGC NET), PGT in Hindi |
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| Abstract | ||
दलित शब्द का अर्थ है वर्ण व्यवस्था के अनुसार सबसे छोटी समझी जान वाली जाति अर्थात् शूद्र। लेकिन दलित की यह परिभाषा उचित प्रतीत नहीं होती। दलित का अर्थ है पीड़ित, शोषित चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, नस्ल या लिंग का हो यदि उसके ऊपर अत्याचार होता है तो वह दलित होता है। दलितों की समस्याओं तथा उत्पीड़न को लेकर जो साहित्य दलितों के द्वारा लिखा गया उसे ही दलित साहित्य कहा गया। लेकिन यह सार्थक नहीं। वास्तव में दलितों के संघर्षों तथा उनकी समस्याओं के बारे में लिखे गए साहित्य को ही दलित साहित्य मानना चाहिए। यह एक कटु सच है कि जैसे समाज परिवर्तित होता है वैसे-2 साहित्य का स्वरूप भी परिवर्तित होता है। |
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| Keywords | ||
| उत्पीड़न, अस्पृश्यता, संकीर्णता, विमर्श | ||
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Statistics
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