सुभाष चन्द्र बोस एवं भारतीय राष्ट्रीय सेना का विश्लेषणात्मक अध्ययन

Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019    PDF ( 211 KB )
Author(s)
Kavita Rani 1

1Extension Lecturer in History, GC Bahadurgarh (India)

Abstract

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सुभाष चन्द्र ने अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने 1921 में आई.सी.एस. की नौकरी से त्यागपत्र देकर अपना समस्त जीवन भारत की आजादी के लिए लगा दिया। उन्होंने देश में संघर्ष न छेड़कर विदेश जानकर जर्मनी की मद्द से भारत को आजादी दिलाने का रास्ता चुना। 1943 में वे दक्षिणी पूर्वी एशिया पहुँचे। उन्होंने आजाद हिन्द फौज का अर्थात् भारतीय राष्ट्रीय सेना पुनर्गठन किया और जापान की सहायता से अंगे्रजों को हिन्दुस्तान से बाहर निकालने के लिए संघर्ष का बिगुल बजा दिया। भेल ही जापान की द्वितीय विश्व युद्ध में पराजय होने के पश्चात् आजाद हिन्द फौज को भी आत्म-समर्पण करना पड़ा हो परन्तु सुभाष के कार्यों से राष्ट्रीय आंदोलन को एक नई दिशा मिली। उनके महान् त्याग एवं बलिदान से ही उन्हें नेताजी की उपाधि से विभूषित किया गया। गांधी जी ने भी उन्हें देशभक्तों का राजकुमार कहकर पुकारा था।

Keywords
विदेश नीति, राजनय, गुटनिरपेक्षता, कश्मीर समस्या, डोकलाम विवाद, संयुक्त राष्ट्र संघ, परमाणु परीक्षण।
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