सिद्धान्तकौमुदी आधारित ऑनलाइन ससूत्रक्रियारूपसिद्धि
| Vol-4 | Issue-5 | May 2019 | Published Online: 15 May 2019 PDF ( 818 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| विवेक कुमार 1; सुभाष, चन्द्र 2 | ||
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1पीएच.डी. (शोधार्थी), संस्कृत विभाग, कला संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली, भारत 2सहायक आचार्य, संस्कृत विभाग, कला संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली, भारत |
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| Abstract | ||
किसी भाषा को समझने के लिये भाषा की प्रमुख इकाईयों का ज्ञान होता अत्यावश्यक है । इनमें ध्वनि, शब्द, वाक्य एवं अर्थ शामिल होते हैं । व्याकरण भाषा के सम्यक् प्रयोग में सहायक होता है । भारतीय भाषाएं प्रायः योगात्मक प्रकृति की भाषाएं हैं । अर्थात् इन भाषाओं में एक ही मूल शब्द से विभिन्न प्रत्यय लगाकर अनेक पदों का निर्माण किया जाता है । पाणिनि व्याकरण भाषाओं में सर्वोत्कृष्ट एवं वैज्ञानिक व्याकरण संस्कृत भाषा पर प्रतिरूपित लगभग 4000 सूत्रों में निबद्ध है । संस्कृत भाषा में इन्हें पद कहा जाता है । संस्कृत में सुबन्त एवं तिङन्त प्रकार के दो पद होते हैं । जिनके अन्त में तिबादि (तिप्-महिङ्) अठारह प्रत्यय लगे होते हैं उन्हें तिङन्त पद कहा जाता है । संस्कृत भाषा में लगभग 2000 धातुएं हैं, जिनसे क्रियापद निष्पन्न होते हैं । प्रस्तुत शोधपत्र इन्हीं तिङन्त पदों की रूपसिद्धिप्रक्रिया के लिये एक ऑनलाइन सिस्टम को प्रस्तुत करना है । इन दस गणों में से सर्वप्रथम गण भ्वादिगण है । भारतीय विश्वविद्यालयीय शिक्षा प्रणाली में प्रक्रिया ग्रन्थों का अध्ययन कराया जाता है । श्रीमद्भट्टोजिदीक्षित विरचित वैयाकरणसिद्धान्तकौमुदी इसका प्रमुख एवं सम्प्रतिष्ठित प्रक्रिया ग्रन्थ है । प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य सिद्धान्तकौमुदी में विश्लेषित भ्वादिगण की क्रियाओं के कर्तृवाच्य के सभी लकारों में क्रियापदरूपसिद्धि हेतु शोधार्थी द्वारा विकसित एक ऑनलाइन सिस्टम को प्रदर्शित करना है । जिसके माध्यम से संस्कृत साहित्य में प्रयुक्त भ्वादिगणीय क्रियापदों की सिद्धि प्रक्रिया (Word formation process) का ज्ञानार्जन किया जा सकता है । यह सिस्टम सूचना प्रौद्योगिकी के युग में संस्कृत क्रियापदसिद्धि के लिये एक ई-लर्निंग स्तर (प्लेटफॉर्म) उपलब्ध कराता है । जिसके माध्यम से छात्र अथवा शिक्षक स्वयं सिद्धिप्रक्रिया सीख व सिखा सकते हैं । यह सिस्टम संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय की विभागीय वेबसाइट http://cl.sanskrit.du.ac.in पर उपलब्ध है । इस सिस्टम के माध्यम से विद्यार्थी भ्वादिगण में पठित किसी भी धातु के रूप की ससूत्र सिद्धि सिद्धान्तकौमुदी के आधार पर ऑनलाइन प्राप्त कर सकता है । साथ ही साथ किसी भी सूत्र पर कर्सर ले जाकर उस सूत्र का अर्थ एवं क्लिक करके व्याख्या भी प्राप्त कर सकता है । |
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| Keywords | ||
| ससूत्र सिद्धि, संस्कृत क्रियारूप सिद्धि, संस्कृत क्रियापद, क्रियारूप, संस्कृत धातुरूप सिद्धि प्रक्रिया | ||
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