विष्णु प्रभाकर के नाटकों में नारी का राष्ट्रीय स्वरूप
| Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019 PDF ( 197 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| सिलक राम 1 | ||
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1सहायक प्रवक्ता दर्श माॅडल डिग्री काॅलेज गोहाना, सोनीपत |
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| Abstract | ||
नाटक साहित्य की वह विधा है जिसमें जीवन की अनुकृति को शब्दगत संकेतों में संकुचित कर, सजीव पात्रों द्वारा एक चलते-फिरते सप्राण रूप में अंकित किया जाता है। नाटक जीवन की सजीव प्रतिलिपि है। विष्णु प्रभाकर प्रमुख नाटककार तथा एकांकीकार हैं जो यथार्थ की भिŸिा पर आदर्श की स्थापना करते हैं। विष्णु प्रभाकर की वह विशेषता है कि उन्होंने अपने नाटकों को मानवीय धरातल पर प्रतिष्ठित कर मानवता में अपना विश्वास प्रकट किया है और मनुष्य के कृत्रिम आवरण को हटाकर यथार्थ चित्रण का सफलतम प्रयत्न किया है। प्रस्तुत शोधपत्र में विष्णु प्रभाकर के नाटकों में नारी के राष्ट्रीय स्वरूप का वर्णन किया गया है। |
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| Keywords | ||
| राष्ट्रवाद, राजनीति, ऐतिहासिक, क्रांतिकारी। | ||
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