विष्णु प्रभाकर के उपन्यासों में परम्परा और आधुनिकता
| Vol-3 | Issue-07 | July 2018 | Published Online: 05 July 2018 PDF ( 223 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| हेमा साकेत तिवारी 1 | ||
| Abstract | ||
साहित्य समाज का प्रतिबिंब होता है। साहित्य के माध्यम से ही मानवीय विचारों एवं भावनाओं का साकार रूप प्राप्त होता है। मानव समाज में जो घटित होता है, साहित्य न केवल उसे प्रदर्षित करता है, वरन् साहित्यकार अपनी कल्पना षक्ति के आधार पर समाज को प्रभावित व प्रेरित भी करता है, इसलिए कहा जाता है कि साहित्यकार समाज की उपज होता है उसकी संरचना में युग धर्म भी झलकता है। कथाषिल्पी विश्णु प्रभाकर एक ऐसे रचनाकार हैं जिन्होंने आधुनिकता के नाम पर हो रहे मानवीय मूल्यों के षोशण को उजागर किया है। उन्होंने आधुनिक जीवन से जुडा मानवीय समस्याओं को न केवल उद्घाटित किया है बल्कि उनका समाधान भी प्रस्तुत किया है। |
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