विज्ञापन में संगीत की भूमिका
| Vol-4 | Issue-04 | April 2019 | Published Online: 15 April 2019 PDF ( 137 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| हरप्रीत कौर 1 | ||
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1असिस्टेंट प्रोफेसर (संगीत गायन विभाग) आर्या काॅलेज, सिविल लाइन्स, लुधियाना |
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| Abstract | ||
प्रस्तुत शोध-पत्र में विज्ञापन तथा संगीत के घनिष्ठ सम्बन्ध तथा संगीत की विज्ञापन में भूमिका पर रोषनी डालने का प्रयत्न किया गया है। विज्ञापन में संगीत एक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। विज्ञापन का उद्देष्य मनुष्य को किसी भी विषय, उत्पाद अथवा सेवा के बारे में जानकारी प्रदान करना होता है। विज्ञापन का अर्थ ही है-विषिष्ट सूचना अर्थात् विज्ञापन सूचना प्रसारित करने का एक अत्यन्त प्रभावषाली माध्यम है। विज्ञापन अति प्राचीनकाल से अथवा संभवतः मानव सभ्यता के उद्गम के साथ ही उदय हुआ प्रतीत होता है जबकि तब इसका स्वरूप आज के विज्ञापन जैसा बिल्कुल भी नहीं था। दूसरों तक अपनी बात पहुंचाने तथा अपना भाव व्यक्त करने की आवष्यकता हेतु विज्ञापन का प्रारम्भ हुआ होगा। दूसरी ओर संगीत सभी ललित कलाओं में सर्वोपरि है तथा अपने मनोभाव किसी के समक्ष प्रस्तुत करने का यह सबसे सुंदर तथा सर्वोत्तम साधन है। संगीत की यही विषेषता विज्ञापन-निर्माताओं को विज्ञापन में इसका प्रयोग करने की ओर प्रेरित करती है। कतिपय ऐसे बहुत ही कम विज्ञापन होंगे, जिनमंे किसी भी प्रकार के संगीत का प्रयोग न हुआ हो। यह संगीत ही है जिसके प्रयोग के कारण कई विज्ञापन उपभोक्ता के मस्तिष्क पर छा जाते हैं, मन में बस जाते हैं। इसीलिए अधिकतर विज्ञापन-निर्माता संगीत का प्रयोग विज्ञापन में करते हैं। किसी भी विज्ञापन को सषक्त बनाने में संगीत की बहुत बड़ी भूमिका है। इस शोध-पत्र को पूर्ण करने में किताबों तथा इंटरनेट इत्यादि की सहायता ली गई है। आषा करती हूं कि इससे संगीत विद्यार्थियों तथा अध्यापक वर्ग को अवष्य ही लाभ होगा। |
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| Keywords | ||
| विज्ञापन, संगीत, विज्ञापन-निर्माता, उपभोक्ता, जन-साधारण | ||
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