राहुल सांकृत्यायन यादों के झरोखें से “विस्मृत यात्री”
| Vol-6 | Issue-02 | February-2021 | Published Online: 14 February 2021 PDF ( 273 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i02.020 | ||
| Author(s) | ||
मंजुला चतुर्वेदी
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1बी.ए., एम.ए. (हिंदी साहित्य), अध्यक्ष, यश मंजुलम सेवा टृस्ट, अहमदाबाद | पी.एच.डी. शोध छात्रा ओ.पी.जे.एस. यूनिवर्सिटी, चुरू, राजस्थान |
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| Abstract | ||
राहुल जी ने अपना पूरा जीवन अपनी यात्राओं को समर्पित किया, उन्हें अपनी विविध यात्राओ में विविध प्रकार के लोगों से मिलने का अवसर मिलता था, उस अवसर को उन्होंने पूर्णतः आत्मसात किया । वे एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के मध्य अपने कई मित्र बना लेते थे, इसके कारण उन्हें उस स्थान का पूर्ण ज्ञान प्राप्त होता था – जिसमें उनका मुख्य लक्ष्य होता था, वहां की आम भाषाको सीखना, वहां के लोगो के साथ मित्रवत् हो जाना, और जो सबसे महत्वपूर्ण था, वह यह की अच्छाईयों और सभ्यता को आत्मसात करना । राहुल जी ने अपने स्वयं के जीवन में काफी संघर्ष किया, किन्तु यह संघर्ष उनके मनोबल को और मजबूती प्रदान करता था । यह शोघ पत्र राहुलजी की अनेक यात्राओ में से ही एक यात्रा को समर्पित है, जहां उन्होनें स्वयं के समान ही एक अन्य व्यक्तित्व का वर्णन किया है । जहाँ “वोल्गा से गंगा” में इन्होंने “वोल्गा तट से लेकर गंगा तक की संस्कृति को दर्शाया है, वहीं इनकी पुस्तक” विस्मृत यात्री “में राहुलजी ने वर्षो पूर्व की संस्कृति को उजागर करते हुए एक व्यक्ति विशेष के सत्य घटना को हम सभी के समक्ष रखा है । ”. |
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| Keywords | ||
| कपिशा (काबुल), संघाराम, सुवास्तु (स्वात) नदी जम्बुदीप (प्राचीन भारत), प्रव्रज्या (साधु), चक्रमण (चहल कदमी) | ||
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