मानव विकास के लिए मूल्य शिक्षा

Vol-4 | Issue-01 | January 2019 | Published Online: 20 January 2019    PDF ( 99 KB )
Author(s)
डॉ. सोनम शर्मा 1

1असिस्टेंट प्रोफेसर, शिक्षा शास्त्र विभाग, कु. मायावती राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बादलपुर, गौतमबुद्धनगर

Abstract

आज हम चाँद और मंगल से भी एक कदम आगे निकल गये हैं। हमने अपने चारों ओर प्रकृति के समानान्तर एक नई दुनिया बना दी है। यह दुनिया ऐसी है, जिसे मानव ने अपनी सुविधा के लिए बनाई है, लेकिन तमाम सुविधा के बाद भी मानव आज सुखी नहीं है। मानव इन सुविधाओं को अपनाने के बाद और विचलित हो गया है, जिसका कारण यह है कि हमने जो प्राप्त किया है उसके सकारात्मक प्रभाव की तुलना में नकारात्मक प्रभाव अधिक है। हमने जो शिक्षा प्राप्त की है वह हमारी ज्ञान-विज्ञान की समझको ऊँचाई पर ले जाने में सहायक रही है लेकिन कहीं न कहीं हम संस्कार, चिंतनशील समाज सम्मत विचारधारा के मामले में पिछड़ रहे हैं और यही मानसिक अशांति का कारण बन गया है। अगर हम ध्यान से, निर्पेक्ष भाव रखकर, अपने चारों ओर परीक्षण करें तो पायेंगे कि समाज में व्यवस्था को चलाने के लिए कुछ मूल्य स्थापित किये गये थे, जो हमे शिक्षा के माध्यम से दिये जा रहे थे। इसे मूल्य परक शिक्षा या शैक्षिक मूल्य की संज्ञा दी गई थी। यही आज शैक्षिक मूल्य या तो हमारी शिक्षा से गायब हो गये हैं या हम उसे छोड़ते जा रहे हैं।

Keywords
मूल्यपरक शिक्षा, डार्विन, स्पेंसर एवं महात्मा गाँधी
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