महिलाओं के सशक्तिकरण में शिक्षा

Vol-4 | Issue-12 | December 2019 | Published Online: 16 December 2019    PDF ( 130 KB )
Author(s)
डाॅ॰ पवन कुमार 1

1सहायक प्रध्यापक (अतिथि) इतिहास विभाग तिलकामाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

Abstract

समाज सामाजिक संबंधों का जाल है। जिसका आधार परस्पर निर्भरता मौलिक आवश्यकताओं की पूत्र्ति एवं नर-नारी का सम्मेलन है। महिलाओं की परिवार और समाज में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष दोनों प्रकार की भागीदारी सुनिश्चित रहती है। उसके द्वारा घर एवं बाहर के कार्यों को बड़ी सहजता एवं सफलता के साथ निर्वहन किया जाता है। इसके बावजूद महिलाओं को समाज के ठेकेदारों ने विभिन्न प्रकार की सुविधाओं एवं अधिकारों से वंचित कर रखा है। वे घर के समस्त कार्यों को तो करती है लेकिन चल-अचल सम्पत्ति से वंचित है, उन्हें मुखग्नि का अधिकार नही है। कृषि के लगभग सभी कार्यों को करती है लेकिन किसानों नहीं कहलाती हैं। दुनिया की आधी आबादी शोषित रहेगी तो विकास सवंभव नही होगा। इस लिये शिक्षा ही एक मात्र ऐसा सशक्त माध्यम है, जो चहुँमुखी विकास करती है। बिना शिक्षा के एक उन्नत मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। और तब बात जब परिवार और समाज की बागडोर संभालने में प्रमुख स्तम्भ के रूप में कार्य करने वाली महिलाओं की हो रही हो तब ऐसे में शिक्षा और महिला शिक्षा की उपयोगिता अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

Keywords
समाज, परिवार, महिलाओं की शिक्षा, संशक्तीकरण, जागरूकता।
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