मधेपुरा जिला के अनुसूचित जनजातियों की सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी से सामाजिक उत्थान: एक अध्ययन

Vol-3 | Issue-06 | June 2018 | Published Online: 19 June 2018    PDF ( 932 KB )
Author(s)
डा0 सूर्य प्रकाश कुमार 1

1इतिहास विभाग, बी0 एन0 एम0 यू0, मधेपुरा, बिहार

Abstract

इस शोध-पत्र के माध्यम से मधेपुरा जिला के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजातियों की श्रम भागीदारी का आकलन किया गया और इससे उनकी जीवन-शैली में उत्थान की अध्ययन किया गया। अनुसूचित जनजातियों जो विशेषाधिकार से वंचित हैं, वे परम्परागत पेशेवर वर्गीकरण के सबसे निचले पायदान पर हैं और उन्हें विशेषकर ग्रामीण समाज में आमतौर पर समाज की स्थानिक एवं सामाजिक सीमाओं से दूर रखा जाता है। इन सबके कारण वो आर्थिक क्रियाकलापों से वंचित रह जाते हैं एवं भविश्य में भी उनकी प्रगति पर ग्रहण लग जाता है। समाज -वैज्ञानिकों ने इसको गरीबी का दुष्चक्र बताया है। मधेपुरा जिला में अनुसूचित जाति और जनजातियों के कुल जनसंख्या 12562 है। जिसमें पुरुषों की सांख्या 3442 और महिलाओां की सांख्या 6010 है, जब कि कुल घरों की सांख्या मात्र 2592 है अथाित एक घर के मुखिया की देखरेख में 5 सदस्य हैं। मधेपुरा जिला कोशी प्रमांडल के अंतर्गत आता है, यहाँ की अधिकाांश आबादी गांवो में बसती है । गरीबी और बेरोजगाारी हर जाति वर्ग में देखने को मिलता है लेकिन यहाँ की अनुसूचित जाति और जनजातियों की स्थिति आजादी के इतने वषों बाद भी बहुत ही दयनीय है। उनकी दशा को दिशा देने के लिए उनको आर्थिक क्रियाकलापों से जोड़ना एकमात्र विकल्प है। उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार उनके स्वयं के प्रयास से एवं समाज के प्रत्येक वर्ग की सकारात्मक सोच और भागीदारी से संभव है।

Keywords
ग्रामीण, श्रम भागीदारी, सामाजिक
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