भारत में पंचायती राज व्यवस्था – एक विशलेषण
| Vol-3 | Issue-11 | November 2018 | Published Online: 10 November 2018 PDF ( 384 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Dr. Hemant Kumar 1; Mrs. Nishi Vashisth 2 | ||
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1Department Of Political Science, Maa Omwati College, Hassanpur, Dist. Palwal, Haryana (India) 2Department Of Political Science, Maa Omwati College, Hassanpur, Dist. Palwal, Haryana (India) |
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| Abstract | ||
पंचायती राज संस्था भारत का मूल लोकतन्त्र है | पंचायती राज संस्थानों को बुनियादी सुविधाओं की सुविधा प्रदान करने, समाज को सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के निम्नस्तर पर विकास प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्थानीय स्व-सरकार माना जाता है | ग्रामीण भारत में लोकतंत्र का विस्तार करने के लिए पंचायती राज की व्यवस्था भारत में स्थापित की गई थी | राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी ने “ ग्राम स्वराज्य ” का स्वप्न देखा था उनमे पंचायती राज व्यवस्था को ग्रामीण भारत के शासन के सर्वोत्तम तरीकों में से एक माना जाता है | “ लोकतान्त्रिक विकेन्द्रीयकरण ” में पंचायती राज संस्थाओं की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है |पंचायतों की परिकल्पना अपने देश में कोई नवीन नहीं है अपितु यह प्राचीन काल से ही मानव समाज के ताने – बाने का अभिन्न अंग रही है | पंचायती राज संस्थाएं भारत के ग्रामीण विकास में जो सहयोग प्रदान कर रही है, यदि हम उसका आकलन करें तो वह किसी भी प्रकार से कम नहीं है | पंचायती राज संस्थाओं का महत्व इस तथ्य से स्वत; स्पष्ट हो जाता है कि अभी हाल ही में भारत सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं के वर्तमान स्वरूप में एकरूपता लाने के,उनको सुसंगठित एवम् प्रभावी बनाने के उद्देश्य से भारतीय संविधान में संशोधन करके “पंचायती राज अधिनियम 1993”को 73वें संवैधानिक संशोधन के रूप में किर्यान्वित किया है | आज कल 26 लाख से अधिक सदस्य पंचायतों के तीनो स्तरों पर चुने जाते है | प्रस्तुत शोध-पत्र में पंचायतों के अधिकार, कार्य तथा शक्तियाँ कितनी स्वायत्त है,कितनी जनोन्मुखी तथा सामाजिक,आर्थिक बदलाव और सामाजिक न्याय के लक्ष्य भेद पाने में कितनी सक्षम रहि, इस सम्बन्ध में समस्याओं, समाधानों एवं महत्व आदि का विवेचन – विश्लेषण क्रमानुसार इस शोध –पत्र में प्रस्तुत किया गया है, साथ ही भारतीय लोकतन्त्र में पंचायती राज वयवस्था का क्या स्थान है?, पंचायती राज व्यवस्था भारतीय लोकतन्त्र में कितनी प्रभावशाली है?, इसका विश्लेषण भी इस शोध-पत्र में किया गया है | |
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| Keywords | ||
| पंचायती राज, शासन, स्व-सरकार | ||
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