भारतीय रीति सिद्धांत में प्रयुक्त दस गुणों का श्रीलंका के विज्ञापनों में प्रयोग
| Vol-5 | Issue-05 | May 2020 | Published Online: 15 May 2020 PDF ( 311 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i05.002 | ||
| Author(s) | ||
डा. संगीत रत्नायक
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1वरिष्ठ अधिव्याख्याता, भाषा अध्ययन विभाग, सबरगमुव विश्वविद्यालय, बेलिहुल्ओय, श्रीलंका। |
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| Abstract | ||
प्रस्तुत शोधकार्य में भारतीय रीति सिद्धांत के दस गुण, श्रीलंका के विज्ञापनों में कहाँ तक प्रयुक्त किये गये हैं, उस बात का निरीक्षण किया गया है। इस अनुसंधान के लिए रीति के दस गुण तथा अंतर्जाल के अंतर्गत श्रीलंका के विज्ञापनों को आधार बनाया गया है। निष्कर्ष के रूप में यह प्रकट हुआ है कि रीति के चुनित दस गुणों में से छः का- प्रसाद, समता, माधुर्य, सौकुमार्य, उदारता (औदार्य) तथा अर्थव्यक्ति- विज्ञापनों में प्रयोग हुआ है। उनमें से चार गुण- ओज, श्लेष, समाधि तथा कांति- प्रयुक्त नहीं हुए हैं। इस प्रकार प्रस्तुत शोध में यह तथ्य प्रकट हुआ कि अधिकतर विज्ञापन रीति के गुणों से प्रभावित है। उनमें से चार गुण प्रयुक्त होते नहीं दिखाई दिये। अतः यह निष्कर्ष किया जा सकता है कि अंतर्जाल के अंतर्गत श्रीलंका के विज्ञापनों में रीति के गुणों का पूरा निर्वाह नहीं हुआ है। रीति के गुणों का पूरी तरह से प्रयोग होने से विज्ञापन अधिकाधिक आकर्षक बनते हैं। |
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| Keywords | ||
| काव्य शास्त्रीय सिद्धांत, रीति के गुण, श्रीलंका के विज्ञापन। | ||
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