प्राकृतिक संसाधनों में परिवर्तन संसूचन एवं प्रेक्षपण जौनसार-बावर क्षेत्र का भौगोलिक अध्ययन
| Vol-4 | Issue-04 | April 2019 | Published Online: 15 April 2019 PDF ( 720 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Shanti Singh 1; Nepal Singh 2; Km. Pooja 3 | ||
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1Research Scholar, Department of Geography in H.N.B. Garhwal University, SRT Campus, Badshahithaul, Tehri Garhwal (Uttarakhand) 2Research Scholar, Department of Geography in H.N.B. Garhwal University, Srinagar (Uttarakhand) 3Research Scholar, Department of Geography in H.N.B. Garhwal University, SRT Campus, Badshahithaul, Tehri Garhwal (Uttarakhand) |
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| Abstract | ||
परिवर्तन प्रकृति का सार्वभौमिक नियम है। परिवर्तन संसूचन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है, कि वास्तव में क्या बदल रहा है। और किन रूप में परिवर्तित हो रहा है। कौन सी भूमि वर्ग किस दूसरे वर्ग में परिवर्तित हो रही है, या हुई है। यह जानकारी दोनों प्रकार की वांछनीय एवं अवांछनीय परिवर्तनों को बताता है। तीव्र दर से बढ़ती जनसंख्या एवं आर्थिक (प्राथमिक क्रिया, द्वितीयक क्रिया, तृतीयक क्रिया) क्रियाकलापों के बदलते स्वरूप के कारण भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण में परिवर्तन होते है। जौनसार -बाबर का अधिकतम क्षेत्र लघु हिमालय में स्थित है। इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधन के अन्र्तगत भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण की सटीक एवं अद्यतन हेतु जानकारी उपलब्ध कराने के लिए भू-उपग्रह से सन् 2000 एवं 2015, यानि 15 वर्षों के भूमि आवरण आॅकडों द्वारा गत्यात्मक विश्लेषण ;क्लदंउपब ंदंसलेपेद्ध किया गया है। अध्ययन क्षेत्र के भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण ;स्न्स्ब्द्ध का गत्यात्मक अध्ययन करने हेतु पाॅच भूमि उपयोग वर्गो (खुली भूमि, सद्यन वन,खुले वन, झाडिया एवं जल,) में विभक्त किया गया है। जौनसार बाबर में प्राकृतिक संसाधनों के अन्र्तगत भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण में हुए परिवर्तनों हेतु आॅकलन करने के लिए दो पृथक-पृथक वर्षों 2000, तथा 2015 के जिनमें 2000 के लिए स्ंदकेंज.ज्ण्ड का उपयोग किया गया वर्ष 2015 के लिए लैण्डसैट-8 ;स्ंदकेंजम.8द्ध आंकड़ा का उपयोग किया गया है। जौनसार-बावर में प्राकृतिक संसाधनों के अंतर्गत भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण मैं परिवर्तन की दरे ;वर्ष 2000 से 2015द्ध से वर्ष 2025 प्रक्षेेपित परिवर्तन भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण किया गया है। भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण में हुऐ परिवर्तन का आंकलन करने के लिए परिवर्तन संसूचन तथा प्रेक्षपण का सांख्यिकीय विश्लेषण किया निकाला गया है। |
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| Keywords | ||
| प्राकृतिक संसाधन, भूमि उपयोग, भूमि आवरण, परिवर्तन संसूचन तकनीकी, प्रेक्षपण, सुदूर संवेदन, गत्यात्मक विश्लेषण। | ||
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