प्रशासन में महिलाओं की भूमिका: स्थानीय प्रशासन के विशेष सन्दर्भ में
| Vol-5 | Issue-8 | August-2020 | Published Online: 17 August 2020 PDF ( 111 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i08.046 | ||
| Author(s) | ||
| Dr. Mahendra Singh Khichar 1 | ||
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1Principal, Vivakanand P.G. College, Sikar |
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| Abstract | ||
भारतीय संस्कृति गरिमा युक्त रही है, क्योंकि इसके मूलतत्व यथार्थवादी एवं जीवन से जुड़े रहे हैं। यह उल्लेखनीय है कि महिलाओं ने भारतीय संस्कृति के अनुरूप पारिवारिक दायित्वों का निर्वाह करते हुए परिवार के पुत्र-पुत्रियों को भारतीय संस्कृति की शिक्षा देकर संस्कृति को पुष्ट किया। भारत पुरूष प्रधान देश है लेकिन देश के गौरव को ऊँचा उठाने एवं पुरूषों को सम्मान जनक स्थान दिलाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वैदिक युग से आज तक बदलते हुए परिवेश में महिलाओं ने समाज एवं परिवार के प्रबंधक और विकास मे अपनी सकारात्मक भागीदारी सिद्ध की है वैसे भी किसी राष्ट्र राज्य एवं समुदाय के सर्वोन्मुखी एवं सतत् विकास प्रगति एवं उन्नति के लिए प्रत्येक वर्ग, आयु, धर्म, जाति, लिंग तथा स्तर के लोगों की सक्रिय भागीदारी तथा किये गये कार्य के परिणामस्वरूप लाभों के न्यायिक एवं अनुपातिक वितरण अतिआवश्यक है। महिलाओं राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया में अहम् भूमिका निभाती है। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इस तथ्य को सभी स्वीकार करते हैं। |
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| Keywords | ||
| सशक्तीकरण, तमाम, अंर्तविरोधों, प्रतिक्रियावादी, राष्ट्रनिर्माण, सर्वोन्मुखी, अनुपातिक | ||
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