पर्यावरण एवं परिस्थितिकी तंत्र पर आधुनिकता का प्रभाव
| Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019 PDF ( 313 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| डा0 ममता देवी 1 | ||
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1सहा0 प्राध्यापक (राजनीतिक शास्त्र) माँ ओमवती महा विद्यालय, हसनपुर (पलवल) |
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| Abstract | ||
आज का मानव भौतिकता एवं आधुनिकता पर इतना आधरित होता जा रहा कि वह मानव जाति के अस्तित्व को ही खतरे में डाल रहा है। अर्थात् पर्यावरण और पारिस्थ्तििकी संकट मौजूदा दौर के ऐसे विषय है जिन पर दुनियाभर में सवाधिक बहस हो रही है क्याकि भौतिकता एवं आधुनिकता का पर्यावरण एवं पारिस्थ्तििकी तंत्र पर जो प्रभाव पडा है। उसे देखकर लगता है कि पर्यावरण एवं पारिस्थ्तिकी तंत्र को मानव से ही खतर हो रहा है। औद्योगिक क्रांति और आधुनिकता विकास की आंधी ने इन धारणाऔं को ध्वस्त कर दिया हैं आज मानव की लालसा को ऊॅचे ऊॅचे पखं लग गए है। उपभोगक्तावादी जीवन मूल्य मनुष्य के जीवन पर हावी हो गए है। जिसके फलस्वरूप मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधनो का बेलगाम दोहन श्ुारू कर दिया है और आज स्थिति यह है कि समस्त विश्व पर्यावरण प्रदूषण और पारिस्थ्तििकी असंतुलन की भयावह समस्या से आक्रंात है। (नदियां सुख रही है, जीव जन्तुओं की प्रजातियाॅ तेजी से खत्म हो रही है, हरे भरे भू- भाग को काट कर वीरान किया जा रहा है, समय से पहले मानव जाति अनेक बीमारियों से ग्रस्त हो कर मौत के गर्त में जा रहें है। आज यह सब देखकर ऐसा लगता है कि विकास की अंधी दौड के बीच मानव पर्यावरण बचाने को लेकर बहस कर रहा है हमें यह समझने की जरूरत है कि अपना पर्यावरण और पारिस्थ्तििकी बचाने की जिम्मेदारी से हम बचते रहे तो अपने हाथों से ही अपने विनास की कहानी लिखेगे।
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| Keywords | ||
| पर्यावरण औद्योगिक क्रांति विकास | ||
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