दरकते रिश्तों का समाज

Vol-5 | Issue-12 | December-2020 | Published Online: 14 December 2020    PDF ( 188 KB )
DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i12.008
Author(s)
डॉ. रंजित एम् 1

1सहायक आचार्य, हिंदी विभाग, एम्.इ.एस कल्लटी कोलेज, मन्नारक्काट, पलाक्काट, केरल

Abstract

साहित्य और समाज का गहरा संबंध है| साहित्य, समाज रूपी शरीर की आत्मा है| समाज अच्छा  हो तो  चरित्र अच्छा होता है | परिवार और समाज के अनुरूप ही एक व्यक्ति में समाजिक गुणों और मानविक मूल्यों का विकास होता है| समाजिक संबंधों एवं संस्थाओं की सृष्टि और  पुनः सृष्टि की आवश्यकता

Keywords
साहित्य परिवार,समाज,रिश्ता , समाजिक संबंधों एवं संस्थाओं की सृष्टि और पुनः सृष्टि
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