जातिगत संघर्ष के केंद्र में तालाब एवम् मौजूदा जल संकट (बिहार के मींव-सुखारीपुर गांव का संदर्भ)
| Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019 PDF ( 465 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| आलोक कुमार 1 | ||
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1शोध छात्र, गोविन्द बल्लभ पन्त सामाजिक विज्ञान संस्थान झूंसी, प्रयागराज |
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| Abstract | ||
यह पेपर बिहार के मींव-सुखारीपुर गांव के क्षेत्र सर्वेक्षण पर आधारित है। विभिन्न सामाजिक समूहों के साक्षात्कार के आधार पर यह देखने को मिला कि तालाब की आवश्यकता लोगों की समृद्धि के अनुसार तय होता है। वह तालाब जो कभी वंचित समुदायों के लिए आजीविका का साधन रहा है, वह आज इसके लगातार अवनयन के कारण जातिगत संघर्ष का केन्द्र बन गया है। वे जो दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति अन्य स्रोतों से कर लेते हैं, उनके लिए तालाब महज जमीन का टुकड़ा है! तथा वे इसे अवसर के नज़रिए से देखते हैं और तालाब को मिट्टी से भरवा कर सब्ज़ी की खेती करते हैं। तथा जिनकी जरुरतें अधूरी रह जाती हैं, उनके लिए त्रासदी है!! इस अवसर और त्रासदी के खेल में तालाब जातिगत संघर्ष का केन्द्र बन गया है। ताालाब को पाट दिए जाने की वज़ह पूरा गांव अभूतपूर्व जल संकट का सामना कर रहा है। बिहार के गंाव न केवल अपनी गैरजिम्मेदार हरक़तों की सज़ा भुगत रहे हैं, बल्कि सरकार की उदासीनता का परिणाम भी झेल रहे हैं। |
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| Keywords | ||
| जातिगत संघर्ष, जल-संकट, वंचित समुदाय, त्रासदी, सार्वजनिक संपत्ति, आजीविका। | ||
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