छत्तीसगढ़ के जिले-गरियाबंद में कमार जनजाति द्वारा बांस कला से कलाकृति निर्माण का अध्ययन

Vol-4 | Issue-7 | July 2019 | Published Online: 15 July 2019    PDF ( 723 KB )
Author(s)
डाॅ. शिप्रा बैनजीर 1; श्रीमती ऋचा ठाकुर 2

1सहायक प्राध्यापक, गृह विज्ञान विभाग, शास.दु.ब. महिला महाविद्याालय, रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत

2शोध छात्रा, गृह विज्ञान विभाग, शास.दु.ब. महिला महाविद्याालय, रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत

Abstract

बांस कला छत्तीसगढ़ की एक पारंपरिक कला है, बांस कला छत्तीसगढ़ की कई जिलों में शिल्पकारों द्वारा बनाई जाती है। बांस से बनी शिल्प इको-फे्रंडली होते है। जिसे छत्तीसगढ़ में बस्तर, कांकेर, गरियाबंद, सरगुजा जिलों में बनाया जाता है। बांस कला द्वारा टोकरी, गुड़िया, चलनी, चटाई, डलिया, आभुषण, चुड़ि, ब्रश होल्डर, लेटर होल्डर व अन्य वस्तुएॅं बनाई जाती है। छत्तीसगढ़ के जिला-गरियाबंद में मुख्यतः कमार जनजाति द्वारा बांस कला का कार्य कई पीढीयों से किया जा रहा है। प्रस्तुत शोध पत्र में जिला-गरियाबंद के कमार जनजातियों के द्वारा बनाए गए बांस शिल्प का अध्ययन किया गया है। जिसमें कमार जनजाति के युवा छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प बोर्ड के सेंटर द्वारा दी गयी प्रशिक्षण से बांस के मनमोहक कलाकृति, फर्नीचर व वस्तुएॅं बना रहे है। जिससे रोजगार भी बड़ रहा है और बांस कला का संरक्षण व लोकप्रियता भी बड़ रही है।

Keywords
बांसकला, जिला-गरियाबंद, कमार जनजाति
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