ग्रामीण महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा: एक समाजशास्त्रीय अध्ययन

Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019    PDF ( 133 KB )
Author(s)
स्वाती सुपुत्री सुरेन्द्र कुमार 1
Abstract

भारत गाँवों का देश है। गाँवों में निवास करने वाले अधिकतर ग्रामीण अभाव में जीते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू हिंसा एक आम बात है। महिलाओं के विरूद्ध ‘घरेलू हिंसा’ एक गंभीर सामाजिक समस्या है। घरेलू हिंसा कानून - 2005 के राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वित किए जाने के बावजूद घरेलू हिंसा के प्रकरणों में निरंतर वृद्धि होती है। महिलाओं के विरूद्ध होने वाली घरेलू हिंसा का अध्ययन करने के लिए हमने रोहतक जिले का ब्राह्मणवास ग्राम का चयन ‘सुविधापूर्ण निर्देशन पद्धति के द्वारा किया गया है। जिसमें शामिल 40 औरतों का साक्षात्कार लिया गया। अध्ययन से पता चला कि अधिकतर ग्रामीण महिलाओं के साथ हिंसा उनके पतियों द्वारा की जाती है एवं हिंसा होने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत कम है। जबकि अपने मायके वालों को बताने वाली महिलाओं का प्रतिशत सबसे अधिक है। हिंसा होने पर परिजनों द्वारा समझौता ही कराया जाता है। उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती।

Keywords
‘घरेलू हिंसा’ सामाजिक समस्या
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