इंटरनेट और जनतंत्रवादी परिवर्तन

Vol-6 | Issue-06 | June-2021 | Published Online: 15 June 2021    PDF ( 141 KB )
DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i06.012
Author(s)
नीरज कुमार राय 1

1असिस्टेन्ट प्रोफेसर, समाजशास्त्र) राजकीय महिला महाविद्यालय, ढिंढुई, पट्टी, प्रतापगढ़

Abstract

इंटरनेट के आज तेजी से हो रहे प्रसार ने एकदम नये किस्म के सामाजिक-राजनीतिक और धार्मिक जन-जागरण की शुरूआत कर दी है। ग्लोबल स्तर पर विचारों के आदान-प्रदान के साथ ग्लोबल स्तर के नये सामाजिक आंदोलनों के लिये एक मार्ग प्रशस्त किया है। जनतंत्र के एकदम नये अध्याय की शुरूआत कर दी है। ग्लोबलाइजेशन विरोधी, युद्ध विरोधी, पर्यावरणवादी, स्त्रीवादी और जनतंत्रवादी संघर्शों के पक्ष में विश्वस्तर पर जनता और संगठनों को गोलबंद करने और जागृति पैदा करने में इंटरनेट की महत्वपूर्ण भूमिका है। सामाजिक, राजनीतिक, पर्यावरण, शांती आदि के सवालों पर साधारण जनता को अपने विचार व्यक्त करने और चेतना विकसित करने का सुनहरा अवसर देता है, आम जनता को ज्वलंत सवालों पर विवादों में शामिल करता है, वास्तव में इंटरनेट ’डिजिटल सिटिजन शिक्षा’ है। यह ग्लोबल नागरिकता, ग्लोबल अस्मिता, ग्लोबल राज्य, ग्लोबल प्रशासन और ग्लोबल धु्रवीकरण और लाभबंदी को संभव बनाता है।   

Keywords
इंटरनेट , ग्लोबलाइजेशन, ज्ञान’ जनित सूचना प्रौद्योगिकी, आॅनलाइन, सार्वभौमिक
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