अमृत राय के उपन्यास में स्त्री-पुरुष संबंधो का चित्रण

Vol-3 | Issue-05 | May 2018 | Published Online: 24 May 2018    PDF ( 294 KB )
Author(s)
Dr.Sapna Gupta 1
Abstract

अमृतराय के उपन्यासों ने स्त्री और पुरुष को विदेशी साम्राज्यवाद के प्रभाव में कुचल दिया और आधुनिक युग की दहलीज पर खड़ा कर दिया। अमृतराय का भारत राजनीतिक अधीनता और औपनिवेशिक आधुनिकता से जूझ रहा था। ब्रिटिश शासन ने बुर्जुआ पूंजीवाद और बुर्जुआ संस्कृति के युग की शुरुआत की। इससे घर और दुनिया के बीच समीकरण बदल गए।Was इन र-आउटर’ डाइकोटॉमी, एक नए बाइनरी में तब्दील हो गया था- घर और दुनिया- बाहरी और भौतिक का प्रतिनिधित्व करने वाला दुनिया, जब कि घर एक की वास्तविक आध्यात्मिक पहचान और आंतरिक का प्रतीक था। महिला ने एक राष्ट्र के मूल्यों को अपनाया और अपनी विरासत और संस्कृति के भंडार के रूप में काम किया, जब कि एक ही समय में, एक धुरी थी जिसके चारों ओर पूरा परिवार घूमता था।

Keywords
परिलक्षित, साम्राज्यवाद, अधीनता, आधुनिकता
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