हरिद्वार जनपद की वार्षिक एंव ऋत्विक फसल विविधता का भौगोलिक अध्ययन

Vol-4 | Issue-5 | May 2019 | Published Online: 25 May 2019    PDF ( 541 KB )
Author(s)
डा0 सत्येन्द्र कुमार 1; ज्योती राय 2

1शोध पर्यवेक्षक, एसोसिएट प्रोफेसर, भूगोल विभाग, हिन्दू काॅलेज, मुरादाबाद (उ0प्र0)

2शोधार्थी, एम0 ए0, नेट, जे0आर0एफ0, भूगोल विभाग, हिन्दू काॅलेज, मुरादाबाद (उ0प्र0)

Abstract

फसल विविधता से तात्र्पय एक निश्चित समय विशेष में किसी स्थान में बोयी जाने वाली फसलों की संख्या से है। फसल विविधता वर्तमान समय में स्थिर कृषि एंव आधुनिक कृषि व्यवस्था की प्रमुख विशेषता है। किसी भी क्षेत्र विशेष के फसल प्रतिरूप के अध्ययन में फसल विविधता की जानकारी विभिन्न प्रकार से सहायक होती है। प्रस्तुत शोध पत्र में हरिद्वार जनपद की फसल विविधता का अध्ययन वार्षिक तथा ऋत्विक(खरीफ, रबी एंव जायद) फसलों के आधार पर किया गया है। अध्ययन क्षेत्र में फसल विविधता का आकलन गिब्स-मार्टिन फसल विविधता सूचकांक के आधार पर किया गया है। अध्ययन क्षेत्र में फसल विविधता सूचकांक किसी वर्ष विशेष तथा खरीफ, रबी एंव जायद ऋतु में बोयी जाने वाली प्रत्येक फसल के क्षेत्रफल के आधार पर ज्ञात किया गया है। हरिद्वार जनपद में फसल विविधता की गणना हेतु जिला सांख्यिकीय पत्रिका वर्ष 1999-2000 तथा वर्ष 2014-15 का उपयोग किया गया है। वार्षिक तथा ऋत्विक आधार पर जनपद की फसल विविधता में अन्तर स्पष्ट रुप से दिखाई देता है। फसल विविधता में वृद्धि का प्रमुख कारण सिंचाई के साधनों की उपलब्धता, उर्वरकों, उन्न्तशील बीजों, कीटनाशकों, कृषि में आधुनिक यंत्रों के प्रयोग, मौसम की अनिश्चितता तथा पारंपरिक कृषि व्यवस्था इत्यादि है।

Keywords
वार्षिक, ऋत्विक, फसल विविधता, फसल विविधता सूचकांक, फसल विशिष्टीकरण।
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