शाहजहाँपुर-नीमराना-बहरोड़ नगरीय समूह के जनसंख्या स्वरूप का शोधपरक अध्ययन
| Vol-3 | Issue-12 | December 2018 | Published Online: 10 December 2018 PDF ( 409 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| करतार सिंह 1 | ||
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1शोधार्थी, भूगोल विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर |
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| Abstract | ||
नगरीय विकास में जनसंख्या सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण घटक है। जनसंख्या वृद्धि का नगरीय भूमि उपयोग पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। जिससे यहाँ का पर्यावरणीय स्वरूप भी प्रभावित होता है, जनसंख्या वृद्धि के साथ भूमि उपयोग में परिवर्तन आना स्वाभाविक है। बढ़ती जनसंख्या जीवन निर्वहन हेतु भूमि पर आश्रित रहती है, परिणामस्वरूप भूमि उपयेाग में परिवर्तन आता है और यह निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। जनसंख्या में वृद्धि होने पर नगरीय विस्तार में वृद्धि होती है। तकनीक द्वारा नगरीय भूमि उपयोग परिवर्तन तीव्रता से होता है, जिससे वहाँ बढ़ती हुई जनसंख्या के लिये आवास परिवहन एवं रोजगार के लिए नवीन क्षेत्रों की आवश्यकता होती है। नगरीय भूमि उपयोग प्रणाली एवं विकास तकनीकी परस्पर सह-सम्बन्धित होते है। जनसंख्या में वृद्धि होने पर कृषि भूमि का अधिकतम उपयोग होने लगता है और तद्नुरूप तकनीकी में परिवर्तन शक्ति संसाधन एवं उपयोग अधिक होने लगता है जो नगरीय विकास को गति देते है तथा अनेक समस्याऐं भी उत्पन्न करती है। |
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| Keywords | ||
| जनसंख्या वितरण, जनसंख्या घनत्व, लिंगानुपात, साक्षरता, कार्यात्मक स्वरूप आदि। | ||
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