वृद्धावस्था का मार्मिक दस्तावेज ‘शटल’
| Vol-5 | Issue-12 | December-2020 | Published Online: 14 December 2020 PDF ( 104 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i12.042 | ||
| Author(s) | ||
| डॉ. श्रुति शर्मा 1 | ||
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1सह आचार्य, हिंदी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर |
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| Abstract | ||
‘शटल’ वृद्धजीवन की मार्मिक कथा है, जो एक व्यक्ति की नहीं पूरे समाज की दास्तान है। भूमंडलीकरण और वैश्वीकरण के इस युग में हमारे नैतिक मूल्यों का क्षरण बहुत ही तीव्र गति से हो रहा है। आज समाज में बुजुर्गों की जो दयनीय स्थिति हो गयी है इस भयावह स्थिति से छुटकारा पाने के लिए हमें इस समस्या की तह तक पहुँचना होगा। युगद्रष्टा कथाकार नरेन्द्र कोहली ने आने वाले समय की झाँकी अपनी कहानी ‘शटल’ के माध्यम से प्रस्तुत की है। समाज में होनेवाली विसंगतियों को जनता तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम कहानी है। समसामयिक समस्याओं तथा घटनाओं को सफल रूप में पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत करने से ही साहित्य अर्थगत होता है। समकालीन कहानीकार मनुष्य जीवन के सभी पहलुओं को अपनी रचनाओं के द्वारा व्यक्त करता है जिनमें वृद्धावस्था भी शामिल है। बुजुर्गों के उपेक्षित जीवन और उनकी अस्मिता को कहानियों में उठाया जा रहा है साथ ही परिवार तथा समाज के द्वारा उनके ऊपर किये जाने वाले अत्याचारों के विरुद्ध भी सशक्त रूप से आवाज़ उठ रही है। |
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| Keywords | ||
| वृद्धावस्था, उत्तरआधुनिकता, सहानुभूति, अकेलापन, निराशा। | ||
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