मानव विकास के विविध आयाम बिहार राज्य के विशेष संदर्भ में
| Vol-4 | Issue-04 | April 2019 | Published Online: 15 April 2019 PDF ( 403 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| प्रत्यूष चंद्र मिश्रा 1 | ||
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1अर्थशास्त्र विभाग मगध विश्वविद्यालय बोधगया। |
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मानवीय विकास की विचारधारा डॉ. महबूब उल हक़ द्वारा प्रस्तावित की गई थी । उनके मुताबिक मानवीय विकास वो विकास है जो लोगो के समक्ष विकल्प बढ़ाए और उनका जीवल बेहतर बनाए अतः, सब विकास लोगों के आस पास ही घूमता है । विकल्प कभी स्थायी नहीं रहते हमेशा बदलते रहते हैं । विकास का मूल उदेश्य है जहां लोगों को सार्थक जीवन जीने के लिए परिस्थितियां बनाई जाए जीवन का कुछ उद्देश्य जरूर होना चाहिए, इसका मतलब लोग स्वस्थ होन चाहिए, अपने हुनर को निखार सकें, सामाजिक भागीदारी और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की छूट एक लम्बा और स्वस्थ जीवन, ज्ञान हासिल करने के लिए सक्षम होना और एक सभ्य जीवन जीने के लिए पर्याप्त साधन होना मानव विकास के बहुत महत्वपूर्ण पहलू हैं इसीलिए, संसाधनों का उपयोग, स्वस्थ्य और शिक्षा मानव विकास में महत्वपूर्ण शेत्र हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास के प्रत्येक कार्यक्रम के अन्तर्गत इस समय पूरी दुनियाँ में भारत और चीन की जनसंख्या को लेकर बहुत चर्चा रहती है । यही बजह है कि दुनिया के अन्य देश भी अपनी आबादी को विकास की कसौटी पर माप और तोल रहे है । दुनियाँ की आबादी को लेकर पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ‘वल्र्ड पापुलेशन प्रास्पेक्ट्स’ की एक रिवीजन रिपोर्ट प्रकाशित हुयी है । इसमें साफ कहा गया है कि है आज दुनियाँ की आबादी जो तकरीबन 7.5 अरब है वह 2030 तक 9.7 अरब और उसके 2050 तक उसके 11.2 अरब होने की उम्मीद है । भारत और चीन के बारे में यह रिपोर्ट खुलासा करती है कि आज चीन की आबादी दुनिया की 19 फीसदी और भारत की 18 फीसदी है । अनुमान है कि 2028 तक भारत चीन को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जायेगा। तब इन दोनों देशों की अपनी-अपनी आबादी 1.5 अरब को पार कर जायेगी । इसके बाद भी भारत की आबादी बढ़ना जारी रहेगी तथा चीन की आबादी में गिरावट की सम्भावनायें प्रबल होंगी । रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि विकसित देशों की आज जो आबादी 1.5 अरब है, इसमें तो कोई खास बदलाव नहीं होगा । परन्तु इसके विपरीत 49 अल्प विकसित देशों की अभी जो आबादी एक अरब के आस-पास है, वह 2050 तक बढ़कर दो अरब जरूर हो जायेगी । आज विश्व की इस बढ़ती जनसंख्या के साथ ही भारत में अहम् सवाल यह है कि क्या इस बढ़ती हुई आबादी को हम केवल संसाधनों का रोना रोकर केवल कोसते रहें अथवा इसके मुकाबले हम अपनी आबादी को श्रेष्ठ मानव संसाधन के रूप में विकसित करते हुए ऐसे कौशल से युक्त बनायें । |
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| Keywords | ||
| मानवीय विकास, सामाजिक भागीदारी, संयुक्त राष्ट्र | ||
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