महिलाओं के विरूद्ध शोषण और हिंसा के लिये उत्तरदायी कारणों में पति द्वारा पत्नी का प्रतारण पर एक समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण
| Vol-4 | Issue-02 | February 2019 | Published Online: 20 February 2019 PDF ( 223 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Dr. Sudha Kumari 1 | ||
|
1Working Teacher Subject of (Home Science) +2 Govt Teacher in Higher Secondary School at Noora Jila Parishad, Patna |
||
| Abstract | ||
विश्व के सभी समाजों में पारिवारिक संस्था के अन्तर्गत स्त्री पुरूष धार्मिक, सामाजिक तथा वैधानिक मान्यता प्राप्त करके पति-पत्नी के रूप में रहते हैं। पति पत्नी के बीच जो सम्बन्ध स्थापित होते हैं, वे अत्यन्त व्यक्तिगत एवं गोपनीय होते हैं, जिसमें किसी दूसरे का हस्तक्षेप अत्यन्त बुरा माना जाता है। दाम्पत्य जीवन में पति-पत्नी को साहचर्य के रूप में माना जाता है। कहीं पर सहयोगी के रूप में तथा कहीं पर उसे दासी के रूप में रखा जाता है। कहीं पर तो केवल भोग्य के रूप में स्थान मिला है। भारतीय परम्परा के अन्तर्गत पत्नी को अद्र्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया जाता है, किन्तु जब व्यवहार में इसका अध्ययन करते हैं तो यह प्रतीत होता है कि पत्नी को किसी भी समाज में श्रेष्ठता प्राप्त नहीं है। वह पति के मातहत मे रहती है और पति अपना व्यक्तिगत अधिकार दिखाकर या अपना व्यक्तिगत सम्पत्ति समझ कर उस पर अनेक प्रकार का जुर्म करना अपना व्यक्तिगत अधिकार समझता है। यही कारण है कि परिवार में पत्नी को किसी भी प्रकार का प्रताड़ना यदि दी जाती तो उसे मात्र व्यक्तिगत मानकर परिवार की चाहरदिवारी में ही सिमट कर रख दिया जाता है। पति अपनी पत्नी को डराता है, धमकाता है, गाली-गलौज करता है तथा उसे अपने वश में रखने के लिए मारता-पीटता है, तो भी उसे कानूनी अपराध की संज्ञा हम नहीं दे पाते। यही कारण है कि प्रायः कई घरों में विभिन्न रूपो में स्त्री-प्रताड़ित होती रही है और परिवार, आस-पड़ोस, गाँव-मुहल्ला, पुलिस प्रशासन, न्यायालय इसे पूर्णतया व्यक्तिगत मानकर छोड़ देते हैं, और हस्तक्षेप नहीं करते हैं। |
||
| Keywords | ||
| पारिवारिक संस्था, वैधानिक, साहचर्य, अद्र्धांगिनी, मातहत | ||
|
Statistics
Article View: 302
|
||

