बिहार में सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक न्याय का उभार
| Vol-5 | Issue-11 | November-2020 | Published Online: 14 November 2020 PDF ( 306 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i11.016 | ||
| Author(s) | ||
डॉ. चिंटू
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1सहायक अध्यापक, अन्जबित सिंह कॉलेज, बिक्रमगंज (रोहतास), वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा (बिहार) |
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| Abstract | ||
बिहार एक ऐसा राज्य है जहाँ राजनीतिक शक्ति लम्बे समय तक उच्च जाति एवं वर्ग के पास रही. लेकिन मध्यम वर्ग भी राजनीतिक- आर्थिक हिस्सेदारी के लिए लम्बे समय से अपनी पैठ बनाने की कोशिश में लगा रहा. यहाँ की पारंपरिक सत्ता को तथा राजनीतिक और आर्थिक वर्चस्व को चुनौती 1970 के दशक में मिलने शुरू हुई. और 1990 के दशक में पिछड़े वर्ग की राजनीति का उभर अपने चर्म पर था जब लालू यादव ने बिहार के मुख्य मंत्री के रूप में सत्ता संभाला. सत्ता का लोकतंत्रीकरण एक झटके में नहीं हुआ बल्कि इसके लिए एक लम्बा समय लगा जिसकी जड़े स्वतंत्र से पहले से देखी जा सकती हैं |
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| Keywords | ||
| सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्ग, बिहार, वामपंथी पार्टियां,राजद, सीपीआई ,माकपा, भाकपा-माले | ||
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