बिहार में अनुसूचित जाति की सामाजिक स्थिति का विश्लेषणात्मक अध्ययन
| Vol-4 | Issue-01 | January 2019 | Published Online: 20 January 2019 PDF ( 145 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Dr. Pranita Kumari 1 | ||
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1Lecturer, Kamleshwari Prasad Singh Teacher Training College, Tekabigha, Bakhtiyarpur, Patna (Bihar) |
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| Abstract | ||
भारत में जाति व्यवस्था की उत्पत्ति ईसा पू0 1500 में आर्यों के आगमन से होती है। आर्यों ने भारत आगमन के बाद कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर आधिपत्य स्थापित किया। आर्यों ने स्वयं को तीन समूहों में संगठित किया। जिनमें से सर्वप्रथम समूह योद्धाओं का था, जो स्वयं को ‘राजन्या’ कहते थे। कालान्तर में ‘राजन्या’ क्षेत्रीय कहलाये। दूसरा समूह धार्मिक कार्यों में संलग्न पुरोहितों और संतों का था जिसे ‘ब्राह्मण’ कहा जाता था। नेतृत्व के लिए दोनों समूहों में कई राजनीतिक संघर्ष हुए और अन्ततः इसमें ब्राह्मण सफल हुए। आर्यों का तीसरा समूह किसानों और कामगारों का था जो वैश्य कहलाये। आर्यों ने भारत के विभिन्न हिस्सों पर अपना वर्चस्व स्थापित कर स्थानीय लोगों को अपने अधीन करना आरंभ किया। इन तीनों समूहों के मध्य एक शुद्र वर्ण भी था जो समाज के विभिन्न कार्यों जैसे मलमूत्र और मृत पशुओं को निकालने वाला सामान्य व्यक्ति था। शुद्र भी दो समुदायों में विभक्त थे। पहले में ऐसे स्थानीय व्यक्ति थे जो आर्यों के अधीन थे और दूसरे जिन्होने आर्यों को अपना वंशज स्वीकार किया। इस प्रकार प्राचीन भारत में विभिन्न उपजातियाॅ पैदा होने लगी। समाज अन्ततः चार वर्णों में विभक्त हुआ- ब्राम्हण, क्षेत्रीय, वैश्य और शुद्र। समाज की यह व्यवस्था धीरे-धीरे वैयक्तिक असमानताओं में बदलते गये और शुद्र समाज के सबसे उपेक्षित वर्ण समझे गए। आजादी के साथ-साथ और स्वतंत्रता के बाद भी भारतीय समाज में व्याप्त इस व्यवस्था को खत्म करने के लिए अनेकानेक आंदोलन हुए और नीतियों के निर्माण एवं कार्यान्वयन कर समाज की इस खाई को पाटने की लगातार कोशिश भी किये गए। इस शोध-आलेख में सबसे उपेक्षित और वंचित वर्ग की सामाजिक स्थिति का अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन विशेष रूप से बिहार राज्य की अनुसूचित जातियों की सामजिक स्थिति का विवरण प्रस्तुत करता है। इस अध्ययन में बिहार की अनुसूचित जातियों की सामजिक स्थिति द्वारा विभिन्न पहलुओं को उजागर किया गया है। |
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| Keywords | ||
| अनुसूचित जाति, आर्य, वर्ण, वंचित वर्ग, राजनीतिक संघर्ष | ||
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