नवाब सुल्तान जहाँ बेगम का शैक्षणिक योगदान
| Vol-3 | Issue-06 | June 2018 | Published Online: 19 June 2018 PDF ( 208 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| कु. शाइस्ता खान 1; डाॅ. राजेश कुमार अग्रवाल 2 | ||
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1शोधार्थी -सामाजिक विज्ञान विभाग, बरकतउल्लाह विश्वविघालय भोपाल, म.प्र 2प्राध्यापक -शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या महाविधालय भोपाल, म.प्र |
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| Abstract | ||
भोपाल रियासत मध्य भारत की प्रमुख रियासतों में से एक थी और हैदराबाद के बाद दूसरी महत्वपूर्ण मुस्लिम रियासतों में सम्मिलित की जाती थी। इसकी स्थापना सरदार दोस्त मोहम्मद खान ने सन् 1708 में की थी। भोपाल रियासत में 1819 से 1926 तक लगातार चार महिला शासकों नवाब कुदसिया बेगम (1819-1837) नवाब सिकन्दर बेगम (1844-1868) नवाब शाहजहाँ बेगम (1868-1901) तथा नवाब सुल्तान जहाँ बेगम (1901-1926) ने शासन किया। इन महिला नवाबों में अन्तिम शासक नवाब सुल्तान जहाँ बेगम ने महिला शिक्षा के क्षे़त्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका भोपाल रियासत पर 25 वर्ष का शासनकाल असाघारण रूप से उज्जवल, प्रगतिशील, और करूणामय रहा। बेगम की सामाजिक और शैेक्षणिक सुघारों में उल्लेखनीय भूमिका रही। उनकी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि स्कूलों ,कालेजों ,तकनीकी संस्थाओं के साथ- साथ महिलाऔं और पुरूषों के लिए आघुनिक शैक्षणिक संस्थायें और चिकित्सा केंद्रों का खोलना था जो कि गाँवों और शहरों में पश्चिमी और यूनानी पेर्टन पर था। इसके लिए उन्होंने अनेक शैक्षणिक एवं सामाजिक सुधार किये। उन्होंने महिलाओें की स्थिती को ऊपर उठाने के लिए अनेक शैक्षणिक सुघार किए। प्रस्तुत शोघ प़त्र में नवाब सुल्तान जहाँ बेगम के शेैक्षणिक सुधारों को उजागर करने का प्रयास किया गया है, जो कि विशेष रूप से महिलाओं के लिए समाज सुघारक के प्रतीक रूप में कार्य करती हैं और भारतीय इतिहास में एक शक्तिशाली छबि बन जाती है। अध्यन का उद्देश्य:- नवाब सुल्तान जहाॅ बेगम के शैक्षणिक योगदान का अघ्यन करना। अध्यन विधि:- प्राथमिक एवं द्वितीयक स्त्रोतों पर आधारित । |
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| Keywords | ||
| शिक्षा, साहित्य, महिला शिक्षा, शैक्षणिक सुधार, अनुदान। | ||
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