खेल से अभिप्राय एवं शारीरिक फिटनेस में इसके महत्व एवं उपयोगिता
| Vol-4 | Issue-5 | May 2019 | Published Online: 25 May 2019 PDF ( 155 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Saroj Devi 1; Dr. Gurdev Singh Virk 2 | ||
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1Research Scholar, Department of physical education Niilm university, Kaithal 2Professor, Department of physical education Niilm university, Kaithal |
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| Abstract | ||
मनुष्य का विकास शारीरिक तथा मानसिक रूप से अधिक देखा जा सकता है। मनुष्य के शरीर को देखकर यह कहा जा सकता है कि उसके द्वारा संतुलित आहार लिया जा रहा है अथवा नहीं लिया जा रहा है। इसी प्रकार उसके द्वारा किए जाने वाले व्यवहारों को देखकर यह कहा जा सकता है कि उसके द्वारा मानसिक विकास किस सीमा तक किया जा रहा है। मनुष्य को एक क्रियाशील प्राणी कहा जाना ठीक होगा। उसके द्वारा विभिन्न प्रकार की क्रियाओं के आधार पर ही भली भाति शारीरिक विकास किया जाता है। जब तक वह कार्यशील रहता है। तब तक वह क्रियाशील रहता है। तब तक उसके द्वारा भली भांति अपने व्यक्तित्व का विकास किया जाता है। खेल बालक के जीवन की सर्वाधिक सुखद अनुभूति है। शारीरिक अंगो में स्फूर्ति और चंचलता, हृदय में आनन्द और प्रसन्नता तथा मन में उत्साह के भाव हमारी जीवन शक्ति को बढ़ा देता है। वास्तव में खेलकूद द्वारा ही बालकों के सर्वांगीण व्यक्तित्व का विकास होता है। खेल का केवल शारीरिक महत्व नहीं है वरन् शैक्षिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक तथा बौद्धिक महत्व भी है। |
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| Keywords | ||
| शारीरिक मानसिक व्यक्तित्व | ||
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