भारतीय समाज में महिलाएँ
| Vol-4 | Issue-5 | May 2019 | Published Online: 25 May 2019 PDF ( 107 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| कुमारी रेखा 1 | ||
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1शोधार्थी, गृह विज्ञान विभाग, जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा |
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| Abstract | ||
भारतीय समाज में आज भी नारी का दर्जा पुरुष से कम है। नारी की मातृत्व-क्षमता का आदर करने के बजाय इसी को उसकी कमजोरी मान लिया गया है। जिस देश में नर-नारी दोनों को एक ही परमबह्म के दो रूप माना गया था उसी देश में नारी की स्थिति नर से निम्न हो गयी। इस भेद-प्रवृत्ति को कायम रखने के लिए धर्म की मदद ली गई। पिण्डदान, वंश-वृद्धि, आर्थिक एकाधिकार के नाम पर जन्म से ही भेद- दृष्टि रखी जाने लगी। नारी को भोग्या, ठगिनी, कुलटा, अबला, अस्पृश्या, कामिनी आदि उपाधियों से नवाजा जाने लगा। माना पुरुष तो भोगी, ठग, कुटिल, कायर, कामी हो ही नहीं सकते या उनमें इन दुष्प्रवृत्तियों की उत्तरदायी सिर्फ नारी ही होती है। आज भी समाचार-पत्रों में पुत्र-प्राप्ति हेतु बलि देने, जन्म से पहले ही पुत्री को मार डालने, दहेज प्रथा के कारण वधुओं को जला डालने, अमानवीय यंत्रणा देने जैसी घटनाएँ पढ़ने को मिलती है। बलात्कार, अपहरण, छींटाकशी, छेड़छाड़ जैसी घटनाओं का तो अन्त ही नहीं है। |
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| Keywords | ||
| बलात्कार, अपहरण, छींटाकशी, छेड़छाड़ | ||
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